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जुलाई, 2008 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

चलो नेता बनें

नेता तरह-तरह के होते हैं. कुछ छोटे, कुछ बड़े, तो कुछ सिर्फ नेता होते हैं. वे क्यों होते हैं, क्या करते हैं, इसका कुछ पता नहीं. वे बस होते हैं. कुछ केवल नाम के होते हैं. जैसे हर गांव में (विशेषकर उत्तरप्रदेश और बिहार के गावों में कई सारे थानेदार, जिलेदार, हवलदार, तालुकरदार केवल नाम के होते हैं) वे ही कुछ नेता होते हैं, बस नाम के. मेरे गांव में (उत्तरप्रदेश के गोंडा जिले के एक गांव, नाम-सिसवा) भी ऐसे तमाम नेता हैं. कुछ की बानगी पेश है ः आग्याराम नेता. इनका काम एक जमाने में सरकार के हर फैसले के खिलाफ गांव से तीन किलोमीटर दूर झिलाही बाजार की रेलवे क्रासिंग के किनारे अनशन पर बैठना था. खुद को विनोबा भावे का शिष्य मानते हैं और अब गांव में एक गौशाला बना लिये हैं. सरकारी और व्यक्तिगत स्तर पर काफी मदद मिली और ३० लाख रुयये लगभग हाथ में आये. अब सरकार के किसी फैसले पर इन्हें ऐतराज नहीं होता. आराम से ५ लाख रुपये से बनी इमारत में रहते हैं. जेनरेटर, मोबाइल, फोन, टीवी और पीने के लिए गायों का दूध व खाने के लिए चारा. अब बात करते हैं आदित्य नेता की. पूरा नाम आदित्य प्रसाद शुक्ल पुत्र स्व तिलकराम शुक्ल. का...

वे दो रास्ते

घर से दफ्तर आने के दो रास्ते हैं. एक रास्ते का प्रयोग रोज करता हूं. दूसरे रास्ते का प्रयोग केवल रविवार को. जिस बस से रोज कार्यालय आता हूं, वह रविवार को बंद रहती है. दूसरी बस दूसरे रास्ते से आती है. आइये पहले पहले रास्ते की बात करें. पहले रास्ते पर एक फ्लाईओवर पड़ता है. फ्लाईओवर के नीचे से बस आती है. फ्लाईओवर के नीचे दूसरी ओर अन्य बड़े शहरों (लोग कहते हैं, पर कलकत्ता बड़ा शहर बन रहा है, अभी नहीं है) की तरह कुछ लोग रहते हैं. प्लास्टिक की चादरें तान कर बड़े बिंदास अंदाज में सोते दिखते हैं उन घरों के अधिकतर पुरुष. शायद निगम के पानी आपूर्ति के समय की बदौलत जिस समय मेरी बस वहां से गुजरती है, उसी समय वहां लगे नल पर बड़ी संख्या में उन प्लास्टिक के घरों में रहनेवाली कुछ महिलाएं और लड़कियां नहा रही होती हैं. हालांकि वे काफी कोशिश करती हैं कि शरीर का अधिकांश हिस्सा ढका रहे, पर ... पहले मेरी दिलचस्पी उन महिलाओं और लड़कियों में हुआ करती थी. आजकल बस के यात्रियों पर नजर रहती है. देखता हूं कि जैसे कभी मैं उन महिलाओं को घूर-घूर कर ताका करता था, वैसे ही बस के अधिकतर पुरुष यात्री ताकते हैं. बस में सवार म...