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तुम्हें हक नहीं हमें यूं बदनाम कर जाओ हाल-ए-दिल सुनो यूं फिर आम कर जाओ राजदार हमारी हर सांस थी तुम में बसी रूठ कर यूं ही न हमें गुमनाम कर जाओ
कोई रूठा हो तो मनाना नहीं आता फर्क पड़ता है कि नहीं बताना नहीं आता बाद मुद्दत के वो आए भी तो क्या प्यार कितना है जताना नहीं आता
मेरे दर्द का हर लम्हा जवाब मांगेगा मेरे आंसू का हर कतरा जवाब मांगेगा जी लूंगा ऐ जिंदगी तुझे मैं यूं ही मेरी मौत पर जो बिखरा जवाब मांगेगा
कोई चैन से सोया है मेरी नींद उड़ा के वो क्यूं हमसे रूठा है मेरी नींद उड़ा के जाकर कह दो यूं हीं न छाएं हैं बादल कोई रात भर रोया है मेरी नींद उड़ा के