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दिसंबर, 2008 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

यह कथा है टीवी की, बीवी की, वोटों की नोटों की...

टीवी वाले भी जब भी मर्जी कुछ भी दिखाने लगते हैं. हाल के दिनों में टीवी चैनलों के टैलेंट हंट शोज ने मेरी रातों की नींद उड़ा दी है. क्या करें मामला टीवी और बीवी का जो ठहरा. रात में घर पहुंचे और न्यूज चैनल देखने की कोशिश करो, तो बीवी टीवी का रिमोट छीन कर उस चैनल पर लगा देती हैं, जिस पर आ रहा होता है टैलेंट हंट शो. यहां सबकुछ होता है, जो पहले सास-बहू छाप ड्रामों में हुआ करता था. रोना-गाना-नाचना और भी बहुत कुछ. एक प्रतिभागी का दूसरे से चल रहा चक्कर तो एंकर सबके बीच में बना हुआ घनचक्कर. फिर बारी आती है वोट मांगने की. नेताओं की तरह ये प्रतिभागी भी मुझ जैसी निरीह जनता से एसएमएस से वोट मांगते हैं. वे तो मांगते हैं वोट और मेरे मोबाइल के घटते हैं नोट. एक-एक वोट की लागत तीन रुपये से कम तो किसी भी हालत में नहीं होती. अब बीवी को कौन बताये कि मेरे मोबाइल से एक रुपये में एसटीडी कॉल हो सकती है, तो फिर एक एसएमएस के लिए तीन रुपये खर्च करने में जान निकल जाती है. पर क्या करें, जब आज तक बड़े-बड़े दिग्गज बीवी के खिलाफ मुंह नहीं खोल पाये, तो मेरी मजाल ही क्या है. खैर जो भी हो मेरी तो जेब ढीली हो ही रही है. कल...

दीज...पॉलिटिशियंस...

जी हां, यही वे चंद शब्द हैं, जो २६-११ को मुंबई में हुए आतंकी हमलों के बाद उसी रात साढ़े तीन बजे ताज होटल से निकाले गये एक बुजुर्गवार ने व्यक्त किये. उनका पूरा वाक्य अंगरेजी में था. हिंदी में उसका मतलब निकलता है, हमारे पास अच्छे जवान, अच्छी सेना, बेहतर एनएसजी कमांडोज हैं, पर दीज बॉस्टर्ड पॉलिटिशियंस...कहीं न कहीं बुजुर्गवार के मुंह से निकले ये चंद शब्द भारतीय मानस की पीड़ा को दर्शा जाते हैं. आखिर कब तक भारतीय इसी तरह पिसते रहेंगे. आखिर कब तक लचर लोकतंत्र की कीमत हमें चुकानी पड़ेगी. जवाब ढूंढ़ने के लिए अधिक दूर जाने की जरूरत नहीं है. जवाब हमारे अपने पास मौजूद है. हम तब तक इसी तरह पिसते रहेंगे, जब युवा शक्ति प्रबंधन, चिकित्सा, इंजीनियरिंग और अन्य क्षेत्रों की तरह राजनीति को भी करियर के रूप में नहीं चुनती. क्योंकि अब तक भारत पर सठियाए लोग ही राज करते रहे हैं. जिस उम्र में संन्यास लिया जाना चाहिए, उस उम्र में हमारे राजनीति दां प्रधानमंत्री बनने की चाह पालना शुरू करते हैं. ऐसा होने का एक कारण और भी है. भारत में कोई व्यक्ति जब राजनीति में कदम रखता है, तो भले ही युवा होता है, लेकिन शिखर पर पहु...