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जनवरी, 2009 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

रियलिटी शो या टीवी का इमोशनल अत्याचार

अगर आप मुंबई महाराष्ट्र की वैशाली को बनाना चाहते हैं संगीत के विश्वयुद्ध का विजेता, तो उन्हें वोट देने के लिए टाइप करें...कोलकाता वेस्ट बंगाल की तोरषा सरकार को इंडियन आइडल बनाने के लिए वोट दें, टाइप करें...और ऐसे ही न जाने कितनी वोट अपील. अब तो आप लोग समझ ही गये होंगे, बात हो रही है आजकल टीवी पर चल रहे रियलिटी शोज की. इनमें डांस और गानों के शो की भरमार है. एक जमाना था, जब टीवी की दुनिया की बेताज बादशाह सास-बहुओं के माध्यम से लोगों पर इमोशनल अत्याचार कर रही थीं, आजकल ये रियलिटी शोज कर रहे हैं. और जिस तरह से ये लोग क्षेत्रीयता को बढ़ावा दे रहे हैं, वह राज ठाकरे की क्षेत्रीयता की भावना से कुछ कम नहीं है. यानी टीवी और फिल्मों के गढ़ मुंबई में रहनेवाले इन लोगों पर भी राज ठाकरे का पूरा-पूरा प्रभाव दृष्टिगोचर हो रहा है.कोई माने या न माने, जिस तरह से वोट के नाम पर ये लोग क्षेत्रीयता को बढ़ावा दे रहे हैं, वह किसी भी तरह से उचित नहीं कहा जा सकता. हाल ही में जी टीवी का सारेगामापा चैलेंज जीतनेवाली वैशाली की कहानी भी कुछ इसी तरह की है. मैं किसी भी तरह से वैशाली के टैलेंट पर कोई प्रश्न नहीं उठा रहा...

उदासी

जिंदगी चलते-चलते अचानक ठहर सी जाती है, तब देखता हूं अपनी ही आंखों में उदासी है। जिन आंखों में डूबकर लिखता था किस्सा मुहब्बत का, उन आंखों के कतरों की उदासी भी तो प्यासी है। तेरी शबनम सी आंहों पर बदल बैठा ये दिल मेरा, तेरे आगोश में रहकर मचल बैठा ये दिल मेरा। तेरी एक भूख ने बदल दी तस्वीर ये कैसी है, जलन दिल की तब जैसी थी, ये वैसी थी ये वैसी है. मैं हंसता हूं, न रोता हूं मेरी तकदीर कैसी है, झपट कर फाड़ दी हो जैसे ये तसवीर वैसी है। तेरे मासूम गुनाहों की सजा, किसी को दे नहीं सकता, मेरे पागल दिल भला मैं तुझको खो नहीं सकता.