तब यह जाना मैंने
अम्मां की आंचल से निकला तब यह जाना मैंने धूप-बारिश, गलन-तपन भी दुनिया में ही होती है भूख-प्यास, दुख-बीमारी, सोना-जगना और रोना अम्मां के साये में भला जगह कहां इनको मिलती है अम्मां को मैंने कभी कहां चैन से सोते देखा है मुस्कान भरी नींद बच्चे की हो तो वह भी सोती है जब भी रोया हूं अम्मां मन ही मन बहुत रोई है आपाधापी खींचातानी में भी वह पास हमारे होती है ममता उसकी अटल सत्य बाकी सब हवाहवाई है तब जाना दुनिया क्यों मां के जाने पर इतना रोती है