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मार्च, 2017 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

कहीं किसी की आह तो नहीं ले ली

कहीं किसी की आह तो नहीं ले ली कहीं किसी का दिल दुखाया तो नहीं चंद सिक्कों की खातिर झूठे बन गए मैंने कभी गैर तुम्हें बनाया तो नहीं    हिदायत जो दी थी दादी ने एक दिन बुजुर्गों को कहीं फिर सताया तो नहीं सदमे में बैठा मेरा रकीब इक कोने में खुशी का राज उसको बताया तो नहीं  तुम खुदा नहीं खुदा जैसे भी नहीं वो जो खुदा है उसे भुलाया तो नहीं -विशाल शुक्ल अक्खड़

चुनावन के दिन मा बड़ा मजा आई

चुनावन के दिन मा बड़ा मजा आई रास्ता कय गदहे भी ओढ़िहैं रजाई चुनावन के दिन मा बड़ा मजा आई कुत्तन का मिलिहै दूध-औ बिस्कुट घोड़न का कच्चा चना-औ तिलकुट खच्चर कय सब होय जाई सगाई चुनावन के दिन मा बड़ा मजा आई चूहा का बिल्ली से निजात दिलाइब बिल्ली का जमकय चूहा खिलाइब  मछलिन के ताईं सगरा खुद जाई चुनावन के दिन मा बड़ा मजा आई नाली कय किरवा सब दारू नहाइहैं गंगा कय प्राणी सब आंख चोरैइहैं बुलबुल के बानी मा प्रचार समाई चुनावन के दिन मा बड़ा मजा आई घोड़ी पर चढ़िहैं चोर-औ उचक्के गाड़ी पर नचिहैं लगायकय सुट्टे तोता-औ-मैना कय पिंजरा रंगाई चुनावन के दिन मा बड़ा मजा आई -विशाल शुक्ल अक्खड़

बिटिया भई विदा घर सूना हो गया

बिटिया भई विदा घर सूना हो गया हंसते चेहरों का दर्द दूना हो गया पिंजरे में फंस गई उड़ती मुनिया   जिस दिन उसका गौना हो गया -विशाल शुक्ल अक्खड़