जरा याद इन्हें भी कर लोः आचार्य गया प्रसाद शुक्ल सनेही
हम भारत छोड़ो आंदोलन की वर्षगांठ मना रहे हैं, हम स्वाधीनता दिवस मनाने की तैयारी कर रहे हैं। आजादी के दीवानों को कुछ खास मौकों पर याद करने की परंपरा सालों से चली आ रही है। यह हमारा दुर्भाग्य नहीं तो और क्या है कि कुछ ऐसा करें, जिससे इन सबकी जरूरत ही न हो और हम पितृ ऋण से भी मुक्त हो सकें। पिछले साल हिन्दी दिवस से पहले तीन दिन हिन्दुस्तान, कानपुर के लिए कानपुर और आस-पास के जिलों के हिन्दी साहित्य के पितृों पर काम करने का अवसर मिला। अगले महीने फिर हिन्दी दिवस है। सो मन किया कि इन पितृों से अगली पीढ़ी को परिचित कराया जाए। सो इनके बारे में उपलब्ध सामग्री अंतरजाल (इंटरनेट) पर डालने का विचार आया। इसी कड़ी में पहली बार आचार्य गया प्रसाद शुक्ल सनेही के बारे में सूक्ष्म जानकारी। आचार्य गया प्रसाद शुक्ल सनेही हड़हा गांव में स्थापित सनेही जी की प्रतिमा जन्म: 21 अगस्त 1883 निधन: 20 मई 1972 हड़हा गांव, जिला उन्नाव, उत्तरप्रदेश आचार्य गया प्रसाद शुक्ल दो उपनामों से लिखते थे, त्रिशूल और सनेही। इन्हें हिन्दी कवि सम्मेलनों का स्थापना करने का श्रेय जाता है। कुछ प्रमुख कृत...