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गर्दभ जी का राज चलेगा

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मेरी बीवी वंडरफुल मुझको पीटे थंडरफुल मुझको तो वह रोज पीटती जैसे दवा की डोज पीटती सुबह पीटती शाम पीटती रात ढले वह रात रीटती ससुरा मेरा थानेदार लेकर उसका नाम पीटती साला भी तो साला है लेकर उसका अरमान पीटती सासू मां का ज्ञान पीटती साली का गुणगान पीटती पिटते पिटते गधा हो गया इलेक्शन में मैं खड़ा हो गया जीतूंगा तो मैं ही अबकी नैया डूबेगी तब सबकी विधानसभा में बैठूंगा मैं कुर्सी पर फिर ऐंठूंगा मैं शोर-शराबा बंद होगा ढेंचू-ढेंचू गूंजेगा धोबी सारे जेल में होंगे भाई-बिरादर मौज में होंगे आदमी को जो कहा गधा उसको दी जाएगी सजा मन का मेरे साज बजेगा गर्दभ जी का राज चलेगा 

गधा ही रहूंगा

गधा था गधा हूं गधा ही रहूंगा सधा था सधा हूं सधा ही रहूंगा न तोड़ूंगा विश्वास उनका कभी बना था बना हूं बना ही रहूंगा  लादकर बोझ कंधे पर चलता रहूंगा सांझ हो दोपहर मैं तो रमता रहूंगा तुम बनो तो बनो मंत्री या विधायक मैं तो जनता था जनता हूं जनता रहूंगा  -विशाल शुक्ल अक्खड़

मेरी नैया थी डूबी मंझधार में

मेरी नैया थी डूबी मंझधार में तुम बने थे खेवैया मेरे प्यार में सच से होते ही सामना ऐ सनम चल दिए तुम झूठ के संसार में    -विशाल शुक्ल अक्खड़