गर्दभ जी का राज चलेगा
मेरी बीवी वंडरफुल मुझको पीटे थंडरफुल मुझको तो वह रोज पीटती जैसे दवा की डोज पीटती सुबह पीटती शाम पीटती रात ढले वह रात रीटती ससुरा मेरा थानेदार लेकर उसका नाम पीटती साला भी तो साला है लेकर उसका अरमान पीटती सासू मां का ज्ञान पीटती साली का गुणगान पीटती पिटते पिटते गधा हो गया इलेक्शन में मैं खड़ा हो गया जीतूंगा तो मैं ही अबकी नैया डूबेगी तब सबकी विधानसभा में बैठूंगा मैं कुर्सी पर फिर ऐंठूंगा मैं शोर-शराबा बंद होगा ढेंचू-ढेंचू गूंजेगा धोबी सारे जेल में होंगे भाई-बिरादर मौज में होंगे आदमी को जो कहा गधा उसको दी जाएगी सजा मन का मेरे साज बजेगा गर्दभ जी का राज चलेगा