संदेश

अक्टूबर, 2012 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

मैं शब्द बेचता हूं

मैं शब्द बेचता हूं, हर लम्हा, हर वक्त बेचता हूं खरीदार एक भी नहीं, फिर भी बेसब्र बेचता हूं, उम्मीद है जहां में कोई खरीदार मिल जाएगा एक बार बिका तो बार-बार बिकता जाएगा। मैं सपने  भी   बेचता हूं, सब अपने बेचता हूं सभी के दर्द बेचता हूं, अपने सब्र बेचता हूं उम्मीद है कोई तो जगनिवार मिल जाएगा एक बार मिला तो फिर कहीं न जा पाएगा। किसी की आह लेने की चाहत नहीं रही, दिल के हर दर्द बिकाऊ हैं  सिर्फ   यहां पर कोई और खरीदे न खरीदे मैं खरीद लूंगा उस दर्द के सहारे मेरा भी  दर्द  खिल जाएगा।

बड़ी खूबसूरत है मेरी जाने बहार

बड़ी खूबसूरत है मेरी जाने बहार बड़ी मासूमियत से करती मनुहार साइकिल है लेनी पर बाद में लूंगी आप जल्दी फिर आना तब खेलूंगी बार-बार करती है मुझसे यही इजहार बड़ी खूबसूरत है मेरी जाने बहार। तोतली जुबां में है किस्से सुनाती घर और स्कूल की हैं बातें बताती मां को भी नहीं देती इसका अधिकार फोन पर करती है है वह बातें हजार बड़ी खूबसूरत है मेरी जाने बहार।

किससे कहूं दिल का हाल

हर बात हर किसी से कही नहीं जाती हर बात हर किसी की सुनी नहीं जाती, उसकी भी न सुनूं ऐसा हो नहीं सकता उसकी आंखों की नमी देखी नहीं जाती। दिन आयेंगे बहार के है उसी का इंतजार इस रात की सुबह स्वर्णिम नशीली होगी, विश्वास करो मेरा, विश्वास रखो मुझ पर यह विषैली हवा कभी मुझे तोड़ नहीं सकती। तुम कहो दिल की हर वक्त समय है साथ ईमान की है रोटी, ईमान की ही है धोती, किसी के कहने से किसी का हो नहीं सकता उनके कहने से क्या,  कयामत यूं आ नहीं सकती