मां रोती क्यों है

उत्तरप्रदेश के अधिकांश हिस्सों में एक प्रथा है. शादी के लिए बेटे की बारात बिदा करते समय,हर मां आखिरी बार बेटे को दूध पिलाती है.उस दौरान अधिकतर मांओं को मैंने रोते हुए देखा है. मेरी मां ने भी शादी के समय मुझे दूध पिलाया था. मैंने देखा कि उसकी आंखें नम थीं. इसका कारण आज तक ढूंढ़ने की कोशिश कर रहा हूं.हर मां अपने बेटे को दूल्हा बने देखना चाहती है. उसकी खुशियां चाहती है. संतान को जरा सी तकलीफ होने पर रोने लगती है. उसकी खुशी के लिए कुछ भी करने के लिए हर समय तैयार रहती है. पर जब बेटा जवान होकर दुल्हनियां लाने चलता है, तो मां रोती क्यों है? क्या इसलिए कि उस दिन उसका बेटा पराया हो जाता है. या फिर इसलिए कि उस दिन मां सबसे अधिक खुश होती है. या फिर इसलिए कि वह यह सोचती है कि जो बेटा कल तक उसकी गोद में खेलता था, कितनी जल्दी बड़ा हो गया. कारण जो भी हो, मां आखिर रोती क्यों है???????????????

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

जरा याद इन्हें भी कर लोः आचार्य गया प्रसाद शुक्ल सनेही

तब यह जाना मैंने

जज्बातों की कहानी