गज़ल से इल्तज़ा
ऐ गज़ल मेरी कसम है तुझको
जब भी जी चाहे घर चली आना
सो रहा होऊं अगर उस वक्त मैं
थपकियां दे मुझे झटपट जगाना
गज़ल जब भी बने चांदनी रातों में
नींद मेरी तू जरा देर से आना
यह दिल तेरा जज्बात तेरे हैं
यहां आने में तुझे क्यों शर्माना
तारों तुम उसे राह भी बता देना
बेसबब न हो तु्म्हारा टिमटिमाना
आफ़ताब मेरे जरा सा ठहर जाना
गज़ल आ जाए उसके बाद आ जाना
जब भी जी चाहे घर चली आना
सो रहा होऊं अगर उस वक्त मैं
थपकियां दे मुझे झटपट जगाना
गज़ल जब भी बने चांदनी रातों में
नींद मेरी तू जरा देर से आना
यह दिल तेरा जज्बात तेरे हैं
यहां आने में तुझे क्यों शर्माना
तारों तुम उसे राह भी बता देना
बेसबब न हो तु्म्हारा टिमटिमाना
आफ़ताब मेरे जरा सा ठहर जाना
गज़ल आ जाए उसके बाद आ जाना
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