साली
आज तुम्हारी आयी है कभी हमारी भी आती थी
आज तुम्हारी भायी है कभी हमारी भी भाती थी
कोई कहता भोली है कोई शर्मीली बताती थी
जब भी वह आती थी खुशबू सी भर जाती थी
जीजा-जीजा कहती आगे-पीछे डोला करती थी
साली अकेली हूं आपकी हर पल याद दिलाती थी
अच्छा है पत्नी से इस पर रार हमेशा होती थी
उसको लेकर हममें तो तकरार हमेशा होती थी
वह भी खुश तुम भी खुश अब क्यों शर्माती हो
यह करो वह मत करो तुम्हीं तो टोका करती थी
आज तुम्हारी भायी है कभी हमारी भी भाती थी
कोई कहता भोली है कोई शर्मीली बताती थी
जब भी वह आती थी खुशबू सी भर जाती थी
जीजा-जीजा कहती आगे-पीछे डोला करती थी
साली अकेली हूं आपकी हर पल याद दिलाती थी
अच्छा है पत्नी से इस पर रार हमेशा होती थी
उसको लेकर हममें तो तकरार हमेशा होती थी
वह भी खुश तुम भी खुश अब क्यों शर्माती हो
यह करो वह मत करो तुम्हीं तो टोका करती थी
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