प्यासे को पानी दे मौला

चाहे समंदर छीन ले प्यासे को पानी दे मेरे मौला
चाहे बवंडर छीन ले मरते को सांसें दे मेरे मौला

छीन ले बादल सभी आसमां के और नमी भर दे
सूरज की तपिश हटा बूंदों को बारिश दे मेरे मौला

छीन ले चांद की चांदनी घर के आंगन से सभी
आंखों में रोशनी दिल में उजाले भर दे मेरे मौला

छीन ले सारे हुनर काबिलियत मेरी तकदीर के
आदमियत बाकी रहे ऐसे जज्बे दे मेरे मौला

छीन ले भले ही तू इस जहां की सारी नेमतें
कुर्बान होऊं वतन पर ऐसी हिम्मत दे मेरे मौला

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

जरा याद इन्हें भी कर लोः आचार्य गया प्रसाद शुक्ल सनेही

तब यह जाना मैंने

जज्बातों की कहानी