गंवार मन
मैं गांव से निकलकर शहर आ गया
बस यहीं पर खुद पे सितम ढा गया
वह बीड़ी का सुट्टा पीछे जो छूटा
सिगार के बहाने अहम आ गया
शहरों की रौनक यह दौलत ही दौलत
गंवार का दिल अब जखम खा गया
रिश्तों से बेईमानी हमसे न होगी
आड़े हमेशा अपना धरम आ गया
जब भी निकला सड़क पर ऐ दिल
सामने आंखों के सनम आ गया
गांव चलने की बेला लगता है आई
समझ में अब शहर का मरम आ गया
लौट चलो अब भी समय है विशाल
मिट्टी में मिलने का करम आ गया
बस यहीं पर खुद पे सितम ढा गया
वह बीड़ी का सुट्टा पीछे जो छूटा
सिगार के बहाने अहम आ गया
शहरों की रौनक यह दौलत ही दौलत
गंवार का दिल अब जखम खा गया
रिश्तों से बेईमानी हमसे न होगी
आड़े हमेशा अपना धरम आ गया
जब भी निकला सड़क पर ऐ दिल
सामने आंखों के सनम आ गया
गांव चलने की बेला लगता है आई
समझ में अब शहर का मरम आ गया
लौट चलो अब भी समय है विशाल
मिट्टी में मिलने का करम आ गया
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