सर्द मौसम की बदरी

सर्द मौसम की बदरी सितम ढा रही है
शाल ओढ़े सनम तू किधर जा रही है

बूंदे गिरने लगी हैं जरा सा ठहर जाओ
संभल कर चल लो कहीं न फिसल जाओ
सांसों की गर्मी दे दो सदा आ रही है
सर्द मौसम की बदरी सितम ढा रही है

भूल से भी न तुम भूल ऐसी करो
हवाओं का रुख देख कर ही चलो
जुल्फों पर ऐसा क्यों कहर ढा रही है
सर्द मौसम की बदरी सितम ढा रही है

छोड़ो बहाने चले आओ हमदम
हमसे न रंजिश दिखाओ यूं प्रियतम
दिल की हर धड़कन सिहर जा रही है
सर्द मौसम की बदरी सितम ढा रही है

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