कोई दियो बताय

पोथी लिखने बैठा पंक्ति लिखी न जाय
ऐसी भीषण ठिठुरन में अंग-अंग थर्राय
कलम बौराई सर्दी से, चलने से घबराई
कैसे लिखूं बातें दिल की कोई दियो बताय

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