जानता हूं...

जानता हूं बादल तू बरसता है क्यों
वो छत पर हैं बैठी तू जलता है क्यों
मेरी छुट्टी है किस दिन ये भी तो जाने
दिल के दर्द बता तू रोता है क्यों

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