महफिलें रास आतीं नहीं

महफिलें रास आतीं नहीं तन्हाई का कता दे दो
मंजिलें पास आतीं नहीं गहराई का पता दे दो
डूब गाए जाने कितने ही दिल सुरमई आंखों में
अब हमें भी ऐसी किसी बेवफाई की सजा दे दो

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