चाहत की तपन

चाहत की तपन से जलने लगा मन
मिलन की खुशबू से खिलने लगा तन
फूलों की गोद में भंवरा लगा खेलन
कोयलों की कूक संग आ गया बसंत

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

जरा याद इन्हें भी कर लोः आचार्य गया प्रसाद शुक्ल सनेही

तब यह जाना मैंने

जज्बातों की कहानी