उतरा है समाजवाद विधायक निवास में...

(29 जून 2015 को हिन्दुस्तान कानपुर में जमूरे जी कहिन कॉलम में प्रकाशित)

सुनो...सुनो...सुनो
देश की सुनो...परदेस की सुनो
इनकी सुनो...उनकी सुनो
सब सुनाने आया है जमूरा...।

का रे जमूरे!
जी, हुजूर।
ई सब का हो रहा समाजवाद मा?
अरे हुजूर! समाजवाद मा तौ सब चकाचक हय। बच्चा लोग अब आउर समय से पहिले बड़ा होय रहा हैं। लैपटाप मिलत है, टैबलेट कय लालीपाप भी थमाय दीन गा है। बिजुली आवय चाहे नाही, लैपटपवा चार्ज करावय बाजार पहुंच जात हैं, फिलमी गाना सुनत हैं औ पता नाही काव खिटिर-पिटिर करत हैं कि देश-दुनिया कै खबर बताय दियत हैं। कहत हैं कउनव गूग्गल महाराज हैं वम्मा जे सबकुछ जानत हैं। आउर तौ आउर तमाम जन कां पिंसिन मिलति है। छोटके बच्चन का तौ स्कुलवा मा दूधव दीन जाय लाग है। आउर का चाही हुजूर।
जमूरे!
तोहरे दिमाग मा तौ भूसा भरा है।
अरे नाही हुजूर...कहूं अदम गोण्डवी वाले समाजवाद कय चर्चा तव नाही करत हव...उनकय तव अलगय राग रहा। कहत रहे,
काजू भुनी प्लेट में, व्हिस्की गिलास में
उतरा

है समाजवाद विधायक निवास में
धत्त जमूरे...ई तौ बहुत पुरान बात है। हम आज कय बात करित है...अरे, कुछ आगे कय सोचव... देश-दुनिया कय नाही तौ कम से कम अपने प्रदेस कय तौ खबर राखा करौ। देखव ई समाजवाद मा का होत है। कहत हैं कि मीडिया लोकतंत्र कय चौथा पावा है... यक-यक कय यहिका उखारय मा लाग हैं सब। ऊ कउनव मंत्री जी हैं भइया... सब कहत हैं कि पत्रकरवा का जरवावय मा वही कय हाथ रहा... तू हव कि कुछ समझतय-बूझत नाही। असली समाजवाद तौ इहै है... कुछ न देखव, कुछ न सुनव, कुछ न बोलव। जवन होत है सब बढि़या... जब समाजवादय आय गा है तौ आउर कौनौ बुराई भला कसत रहि सकत है... ऊ पत्रकारवा पता नाही कहां से बुराई खोज लावा रहा...। अब भला समाजवाद औ बुराई कय कौनौ संबंधय नाही तव फिर ऊ जरावा गवा हुवय इहव नाही होय सकत। ई सब समाजवाद का बदनाम करय के खातिर झूठय फैलाय दीन गा है..., समझे...।
जी, हुजूर...।
-विशाल शुक्ल अक्खड़ 

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