सच कहता हूं बात बड़ी है
बचपन की यह आस खरी है
इंसा बनना इतना मुश्किल
कहकर मुझसे रोज लड़ी है
#विशाल शुक्ल अक्खड़
बुक डिपो संजोए है वंशीधर शैदा की यादें वंशीधर शैदा जन्म: 20 जुलाई 1904 निधन:15 नवंबर 1988 जन्म स्थान: ग्राम कक्योली तहसील कायमगंज, जनपद फर्रुखाबाद फर्रुखाबाद की माटी में जन्मे वंशीधर शैदा की यादें उनके द्वारा स्थापित किया गया बुक डिपो संजोए हुए है। पड़ोसियों ने भले ही शैदा को नहीं देखा मगर वे उनकी शख्शियत के बारे में काफी कुछ जानते हैं। उनका घर अब काफी पुराना और जर्जर हो चुका है। यहीं पर उनके बेटे और परिवार के अन्य सदस्य रहते हैं। हालांकि उनके नाम को और जीवंत रखने के लिए शासन स्तर से कोई गंभीर प्रयास नहीं किए गए। 7 जुलाई 1927 को वंशीधर शैदा ने लोहाई रोड पर शैदा बुक डिपो की स्थापना की थी और यहीं पर रामायण प्रेस भी चलाते थे। उनकी क ई पुस्तकें ब्रिटिश सरकार ने जब्त कर उनके प्रकाशन पर रोक लगा दी थी। वर्ष 1932 में शैदा के मित्र कृष्णगोपाल चतुर्वेदी ने वाल्मीकि रामायण को तुलसीकृत रामायण की तरह दोहा चौपाइयों में रचने की इच्छा प्रकट की। उसके तुरंत बाद से ही शैदा ने रामायण की रचना प्रारंभ कर दी। शैदा की रचित पुस्तकें देश में ही नहीं बल्कि फिजी, कनाडा, बहरीन, ओमान, आस्ट्रेलिया आदि देश...
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