मैं हंसता हूं
वह हंसती है
मैं रोता हूं
वह रोती है
मैं पिता हूं
वह बेटी है
मैं सेंकता हूं
वह सिंकती है
मैं खाता हूं
वह घुलती है
मैं याचक हूं
वह रोटी है
मैं सजता हूं
वह सजती है
मैं हर्षित हूं
वह मुदित है
मैं आदम हूं
वह धोती है
मैं सिसका हूं
वह सिसकी है
मैं बिलखा हूं
वह बिलखी है
मैं विद्यार्थी हूं
वह सोंटी है
मैं बढ़ता हूं
वह रुकती है
मैं चढ़ता हूं
वह गिरती है
मैं किस्मत हूं
वह खोटी है
-विशाल शुक्ल
‘अक्खड़’

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