गधा ही रहूंगा

गधा था गधा हूं गधा ही रहूंगा
सधा था सधा हूं सधा ही रहूंगा
न तोड़ूंगा विश्वास उनका कभी
बना था बना हूं बना ही रहूंगा 

लादकर बोझ कंधे पर चलता रहूंगा
सांझ हो दोपहर मैं तो रमता रहूंगा
तुम बनो तो बनो मंत्री या विधायक
मैं तो जनता था जनता हूं जनता रहूंगा 
-विशाल शुक्ल अक्खड़

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

जरा याद इन्हें भी कर लोः आचार्य गया प्रसाद शुक्ल सनेही

तब यह जाना मैंने

जज्बातों की कहानी