कहीं किसी की आह तो नहीं ले ली
कहीं किसी की आह तो नहीं ले ली
कहीं किसी का दिल दुखाया तो नहीं
चंद सिक्कों की खातिर झूठे बन गए
मैंने कभी गैर तुम्हें बनाया तो नहीं
हिदायत जो दी थी दादी ने एक दिन
बुजुर्गों को कहीं फिर सताया तो नहीं
सदमे में बैठा मेरा रकीब इक कोने में
खुशी का राज उसको बताया तो नहीं
तुम खुदा नहीं खुदा जैसे भी नहीं
वो जो खुदा है उसे भुलाया तो नहीं
-विशाल शुक्ल अक्खड़
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